
मैंने कुछ पंक्तियां लिखीं हैं । मैं कवि नहीं हूँ लेकिन जैसा मन में आया वैसा ही लिखता गया। उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आएगा । मुझे कमेंट कर के ज़रूर बताना ।
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यूँ ही नहीं मुस्कुराती मैं
गम का सागर दिल में लिए हुए
दुनिया की इस पहेली में
अकेली झूंझती
यूँही नहीं मुस्कुराती मैं
दिल पे लगी चोट को छुपाते
जुदाई का दर्द सहते अकेली
यूँही नहीं मुस्कुराती मैं
इस बेदर्द दुनिया के सामने
एक लड़की होने का दर्द छुपाते
अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ते
यूँही नहीं मुस्कुराती मैं
ए दुनिया वालो
मेरे दर्द को समझो
इस हँसी के पीछे जो छुपा है
आपके सवालों के जवाब
आपने दिया हुआ दर्द
मेरा छीना हुआ बचपन
मेरी छीनी हुई आज़ादी
इस कों भुलाने के लिए
मुस्कुराती रहती हूँ मैं
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धन्यवाद 🙏
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