Do you need time? ए ज़िन्दगी क्यों मुझे और वख्त देना चाहती हो पहले ही बहुत ज़ख़्म सह चुका हूँ अब और सहा नहीं जायेगा वही रोज़ की कश्मकश एक आँख आसु और एक आँख में ख़ुशी कभी दूर से ख़ुशी का पैग़ाम आता है तो कभी नज़दीक से तकलीफ़ देह ख़बर जितनी ख़ुशी इतनाContinueContinue reading “ज़िंदगी की कश्मकश”