मिलते रहो दोस्तों

Friends

जैसे मन से शब्द निकलते गए वैसे ही लिखे हैं

अगर आपको पसंद आए तो कमेंट्स में जरूर लिखना

मिलते रहो दोस्तों

ज़िंदगी यूं गुज़र जाएगी

बचपन निकल गया

जवानी के सपने देखते देखते

जवानी गुज़र गई

ज़िंदगी की उलझनों में

मिलते रहो दोस्तों

ज़िंदगी यूँ गुज़र जाएगी

कब बुढ़ापा दबे पाँव चला आया

पता ही नहीं चला

ज़िंदगी जीना रह गया

इसी उलझनो में

मिलते रहो दोस्तों

ज़िंदगी यूँ गुज़र जाएगी

अब सिर्फ़ पुरानी यादों का सहारा है

दोस्तों के साथ वक्त गुज़र जाता हैं

हँसी मज़ाक़ में

मिलते रहो दोस्तों

ज़िंदगी यूँ गुज़र जाएगी


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Published by Mukund Karadkhedkar

Engineer by profession and Wildlife Photographer by passion. Loves nature.

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